चाँद की रौशनी सा ,

पेड़ो की छाँव सा है ...

कैसे ब्यां करूँ वो कैसा है ...

मेरा गुरु मेरे गुरु जैसा है ।



धुप की किरण सा ,

वो मीठी सी हवा सा है ....

कैसे ब्यां करूँ वो कैसा है ,

मेरा गुरु तो गुरु जैसा है .।



वो निस्वार्थ प्रेम सा ,

वो प्यारा एक एहसास सा है ....

कैसे ब्यां करूँ वो कैसा है ,

मेरा गुरु तो बस गुरु जैसा है ।




वो अत्यन्त सृष्टि सा ....

वो हमारी पूरी दुनिया सा है ,

कैसे ब्यां करूँ वो कैसा है ...

मेरा गुरु तो बस गुरु जैसा है ।


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