Human beings should become Gyanyogi, i.e. achieve wisdom. After that, the person should aim to become a Karmayogi, while doing good deeds. The person who connects with the name of Ram, gets rid of his bad deeds and intoxicants, he is used to. The person who undertakes devotion, leaving lust,anger, greed, attachment, ego, etc. he is able to attain the divine glimpse of the Master.- Saint Dr. Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan.



इन्सान को ज्ञानयोगी बनना चाहिए। उसके बाद इन्सान को अच्छे कर्म करते हुए कर्मयोगी बनना चाहिए। जो इन्सान राम-नाम से जुड़ जाता है, उसके बुरे कर्म व नशे भी छूट जाते है। जो इन्सान काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार, मन-माया को छोड़कर उस मालिक की भक्ति करता है, उसे मालिक के दर्श-दीदार जरूर होते है। -संत डॉ गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां|

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